स्नातक स्तरीय इंजीनियरिंग छात्रों की चिंता एवं अवसाद को कम करने में मानसिक थेरेपी की प्रभावशीलता
Abstract
प्रस्तुत अध्ययन का उद्देश्य स्नातक स्तरीय अभियांत्रिकी छात्रों की चिंता एवं अवसाद को कम करने में मानसिक चिकित्सा की प्रभावशीलता का अध्ययन करना था। वर्तमान उच्च शिक्षा व्यवस्था में शैक्षणिक दबाव, कठिन पाठ्यक्रम, परीक्षा संबंधी तनाव, परियोजना कार्य, अत्यधिक प्रतिस्पर्धा, रोजगार की अनिश्चितता तथा अभिभावकीय एवं सामाजिक अपेक्षाएँ विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारक हैं। विशेष रूप से अभियांत्रिकी शिक्षा में विद्यार्थियों को निरंतर उच्च शैक्षणिक प्रदर्शन बनाए रखने का दबाव रहता है, जिसके कारण उनमें चिंता, तनाव, निराशा तथा अवसाद जैसी मनोवैज्ञानिक समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं। प्रस्तुत अध्ययन में मात्रात्मक अनुसंधान दृष्टिकोण तथा पूर्व-परीक्षण एवं पश्च-परीक्षण आधारित हस्तक्षेप अनुसंधान अभिकल्प को अपनाया गया। उदाहरणात्मक सांख्यिकीय विश्लेषण के लिए 100 स्नातक स्तरीय अभियांत्रिकी छात्रों को सम्मिलित किया गया। विद्यार्थियों की चिंता एवं अवसाद का मापन मानसिक चिकित्सा से पूर्व तथा चिकित्सा सत्रों की समाप्ति के पश्चात किया गया। प्राप्त आँकड़ों का विश्लेषण मध्यमान, मानक विचलन, युग्मित नमूना ‘टी’ परीक्षण, प्रभाव-आकार, पियर्सन सहसंबंध, बहु-प्रतिगमन तथा पुनरावृत्त मापन विश्लेषण द्वारा किया गया। परिणामों से ज्ञात हुआ कि मानसिक चिकित्सा के पश्चात छात्रों की चिंता एवं अवसाद दोनों के औसत अंकों में उल्लेखनीय कमी आई। चिंता का पूर्व-परीक्षण मध्यमान 24.68 से घटकर पश्च-परीक्षण में 17.42 हो गया, जबकि अवसाद का पूर्व-परीक्षण मध्यमान 23.91 से घटकर 16.85 रह गया। युग्मित ‘टी’ परीक्षण में दोनों चर के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण अंतर प्राप्त हुआ। प्रभाव-आकार के परिणामों ने भी चिंता तथा अवसाद दोनों में बड़े प्रभाव का संकेत दिया। अतः अध्ययन से यह निष्कर्ष प्राप्त हुआ कि संरचित मानसिक चिकित्सा स्नातक स्तरीय अभियांत्रिकी छात्रों में चिंता एवं अवसाद को कम करने तथा उनके मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में उपयोगी हो सकती है।
How to Cite This Article
विष्णु देव सिंह, डॉ. प्रदीप कुमार (2023). स्नातक स्तरीय इंजीनियरिंग छात्रों की चिंता एवं अवसाद को कम करने में मानसिक थेरेपी की प्रभावशीलता . International Journal of Multidisciplinary Evolutionary Research (IJMER), 4(1), 96-105. DOI: https://doi.org/10.54660/IJMER.2023.4.1.96-105